
भारत के रत्न और आभूषण (Gems and Jewellery) निर्यात में नवंबर महीने के दौरान जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के अनुसार, नवंबर 2025 में देश का कुल निर्यात 19.64 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 2.1 अरब डॉलर था।
अप्रैल–नवंबर में कुल निर्यात स्थिर
हालांकि पूरे वित्त वर्ष के अब तक के आंकड़े देखें तो अप्रैल से नवंबर के बीच भारत का कुल रत्न-आभूषण निर्यात 18.86 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 18.85 अरब डॉलर के लगभग बराबर है। यानी सालाना आधार पर कुल निर्यात फिलहाल स्थिर बना हुआ है।
हीरा निर्यात में मजबूत सुधार
नवंबर में कट एंड पॉलिश्ड डायमंड (Cut & Polished Diamonds) का सकल निर्यात बढ़कर 919.74 मिलियन डॉलर हो गया, जो पिछले साल इसी महीने 666.34 मिलियन डॉलर था।
इसके साथ ही पॉलिश्ड लैब ग्रोन डायमंड का निर्यात भी 10.55 प्रतिशत बढ़कर 76.09 मिलियन डॉलर रहा, जो एक साल पहले 68.83 मिलियन डॉलर था।
सोने के आभूषणों पर कीमतों का असर
सोने के आभूषणों (Gold Jewellery) के निर्यात पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर दिखा। नवंबर में इसका निर्यात लगभग स्थिर रहकर 1.21 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल यह 1.23 अरब डॉलर था।
स्टडेड गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी में रिकॉर्ड उछाल
नवंबर में स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी के निर्यात में जबरदस्त उछाल देखा गया। यह बढ़कर 828.89 मिलियन डॉलर हो गया, जो पिछले साल 555.39 मिलियन डॉलर था।
वहीं सिल्वर ज्वेलरी का निर्यात भी तेजी से बढ़कर 197.97 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह सिर्फ 63.99 मिलियन डॉलर था।
प्रमुख बाजारों से मांग में सुधार
GJEPC के चेयरमैन कीरत भंसाली के अनुसार,
“अंतरराष्ट्रीय बाजार धीरे-धीरे स्थिर हो रहे हैं। हांगकांग, चीन और मिडिल ईस्ट जैसे बाजारों से मांग में सुधार देखने को मिल रहा है। अमेरिका में भले ही मांग धीमी हो, लेकिन अन्य बाजारों की मजबूत मांग से कुल निर्यात को समर्थन मिल रहा है। भारत में जॉब वर्क की बढ़ती मांग के कारण गोल्ड स्टडेड ज्वेलरी का निर्यात तेजी से बढ़ा है।”
निष्कर्ष
नवंबर के आंकड़े बताते हैं कि भारत का रत्न और आभूषण क्षेत्र धीरे-धीरे मजबूती की ओर बढ़ रहा है। खासकर हीरे, स्टडेड गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी में आई तेजी आने वाले महीनों में निर्यात को नई गति दे सकती है। यदि वैश्विक मांग इसी तरह बनी रहती है, तो आने वाले समय में यह सेक्टर भारतीय निर्यात का मजबूत आधार बन सकता है।
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